1. संविधान का अर्थ
संविधान किसी देश को चलाने वाले मूल नियमों और सिद्धांतों का संग्रह होता है। इसमें यह बताया जाता है कि देश में सरकार कैसे बनेगी, सरकार की शक्तियाँ क्या होंगी, नागरिकों के अधिकार क्या होंगे तथा सरकार और नागरिकों के बीच संबंध कैसे होंगे।
सरल शब्दों में—
संविधान देश को चलाने के लिए बनाए गए मूल नियमों और सिद्धांतों का दस्तावेज है।
संविधान में मुख्य रूप से निम्न बातें होती हैं—
- सरकार का स्वरूप
- सरकार के विभिन्न अंग
- सरकार की शक्तियाँ
- नागरिकों के अधिकार
- नागरिकों के कर्तव्य
- चुनाव की व्यवस्था
- न्यायपालिका की व्यवस्था
- केंद्र और राज्यों के संबंध
- देश के मूल आदर्श और उद्देश्य
2. संविधान की आवश्यकता क्यों होती है?
किसी देश में अलग-अलग धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र और विचारों के लोग रहते हैं। सभी लोगों की आवश्यकताएँ और विचार समान नहीं होते।
इसलिए देश को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए कुछ मूल नियमों की आवश्यकता होती है।
संविधान मुख्य रूप से चार महत्वपूर्ण काम करता है।
(क) समाज में समन्वय स्थापित करना
समाज में अलग-अलग समूह और समुदाय होते हैं। संविधान उनके बीच सहयोग और समन्वय स्थापित करने के लिए मूल नियम देता है।
इससे लोगों को पता रहता है कि उन्हें किस प्रकार व्यवहार करना है।
(ख) सरकार का गठन करना
संविधान यह तय करता है कि सरकार कैसे बनेगी और सरकार के विभिन्न अंगों की शक्तियाँ क्या होंगी।
भारत में सरकार के प्रमुख अंग हैं—
- विधायिका
- कार्यपालिका
- न्यायपालिका
(ग) सरकार की शक्तियों पर नियंत्रण
सरकार को असीमित शक्ति नहीं दी जा सकती।
संविधान सरकार की शक्तियों की सीमाएँ तय करता है, ताकि सरकार मनमाने ढंग से नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन न कर सके।
(घ) नागरिकों के अधिकारों की रक्षा
संविधान नागरिकों को अनेक अधिकार प्रदान करता है और उनकी रक्षा की व्यवस्था करता है।
भारत के संविधान में मौलिक अधिकार नागरिकों की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करते हैं।
3. संविधान के प्रमुख कार्य
संविधान के प्रमुख कार्य निम्न हैं—
1. शासन के लिए मूल नियम बनाना
संविधान देश की शासन व्यवस्था के लिए मूल नियम निर्धारित करता है।
2. सरकार की संरचना निर्धारित करना
यह बताता है कि सरकार कैसे बनेगी और उसके विभिन्न अंग कैसे काम करेंगे।
3. शक्तियों का वितरण
सरकार की शक्तियों को विभिन्न संस्थाओं में बाँटा जाता है।
4. सरकार की शक्ति को सीमित करना
सरकार संविधान के अनुसार ही कार्य कर सकती है।
5. नागरिकों के अधिकारों की रक्षा
संविधान नागरिकों को मूल अधिकार देता है।
6. देश के आदर्शों को व्यक्त करना
संविधान देश के लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता, न्याय और धर्मनिरपेक्षता जैसे आदर्शों को व्यक्त करता है।
4. संविधान की सत्ता / प्राधिकार
अब सवाल आता है कि लोग संविधान का पालन क्यों करते हैं?
किसी संविधान की सफलता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि वह कागज पर लिखा हुआ है। लोगों और सरकार को उसकी वैधता स्वीकार करनी चाहिए।
संविधान की सत्ता के प्रमुख आधार हैं—
1. संविधान का उचित निर्माण
यदि संविधान जनता की इच्छा और भागीदारी से बनाया गया हो तो उसकी स्वीकार्यता अधिक होती है।
2. संविधान के मूल सिद्धांत
संविधान में ऐसे सिद्धांत होने चाहिए जिन्हें समाज के लोग उचित और न्यायपूर्ण मानें।
3. संस्थाओं के बीच शक्ति का संतुलन
यदि सारी शक्ति किसी एक संस्था या व्यक्ति के हाथ में हो तो उसका दुरुपयोग हो सकता है।
इसलिए संविधान विभिन्न संस्थाओं के बीच शक्तियों का विभाजन करता है।
5. भारतीय संविधान का निर्माण
भारत का संविधान संविधान सभा द्वारा बनाया गया।
भारत में संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के आधार पर हुआ। संविधान सभा के सदस्य मुख्य रूप से प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए थे।
संविधान सभा की पहली बैठक
संविधान सभा की पहली बैठक:
9 दिसंबर 1946
को हुई।
इसके अस्थायी अध्यक्ष थे—
डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
बाद में संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष बने—
डॉ. राजेंद्र प्रसाद
6. संविधान सभा के महत्वपूर्ण व्यक्ति
भारतीय संविधान निर्माण में अनेक नेताओं और विद्वानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद
वे संविधान सभा के अध्यक्ष थे।
डॉ. भीमराव अंबेडकर
वे प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष थे।
जवाहरलाल नेहरू
उन्होंने संविधान के उद्देश्यों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उद्देश्य प्रस्ताव (Objectives Resolution) प्रस्तुत किया।
सरदार वल्लभभाई पटेल
उन्होंने संविधान के अनेक महत्वपूर्ण प्रावधानों और रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
7. प्रारूप समिति
संविधान सभा ने संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए प्रारूप समिति का गठन किया।
इसके अध्यक्ष थे—
डॉ. भीमराव अंबेडकर
प्रारूप समिति ने संविधान के प्रारूप को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
8. उद्देश्य प्रस्ताव
13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
इस प्रस्ताव में स्वतंत्र भारत के मूल उद्देश्यों और आदर्शों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
बाद में इसी विचारधारा ने संविधान की प्रस्तावना के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।
9. संविधान निर्माण में कितना समय लगा?
भारतीय संविधान को बनाने में लगभग 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन लगे।
संविधान सभा ने लगभग 11 सत्रों में संविधान पर विचार-विमर्श किया।
संविधान को—
26 नवंबर 1949
को अपनाया गया।
संविधान लागू हुआ—
26 जनवरी 1950
को।
इसी कारण 26 जनवरी को भारत में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
10. भारतीय संविधान की विशेषताएँ
भारतीय संविधान की कई महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं।
1. लिखित संविधान
भारत का संविधान एक विस्तृत लिखित संविधान है।
2. लोकतांत्रिक व्यवस्था
भारत में जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनाव के माध्यम से चुनती है।
3. गणराज्य
भारत में राष्ट्राध्यक्ष का पद वंशानुगत नहीं है।
4. संघीय व्यवस्था
भारत में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है।
5. संसदीय शासन प्रणाली
भारत में संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई है।
6. मौलिक अधिकार
नागरिकों को मौलिक अधिकार दिए गए हैं।
7. स्वतंत्र न्यायपालिका
न्यायपालिका को स्वतंत्र रखा गया है, ताकि वह संविधान और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कर सके।
8. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
भारत में निर्धारित आयु पूरी करने वाले नागरिकों को मतदान का अधिकार प्राप्त है।
11. दूसरे देशों के संविधान से लिए गए प्रावधान
भारतीय संविधान निर्माताओं ने दूसरे देशों की संवैधानिक व्यवस्थाओं का अध्ययन किया और भारत की आवश्यकताओं के अनुसार कई प्रावधानों को अपनाया।
उदाहरण—
| देश | प्रमुख विशेषता |
|---|---|
| ब्रिटेन | संसदीय शासन प्रणाली |
| अमेरिका | मौलिक अधिकार, न्यायिक समीक्षा |
| आयरलैंड | राज्य के नीति-निर्देशक तत्व |
| कनाडा | मजबूत केंद्र वाली संघीय व्यवस्था |
| ऑस्ट्रेलिया | समवर्ती सूची आदि |
| दक्षिण अफ्रीका | संविधान संशोधन से संबंधित कुछ प्रावधान |
महत्वपूर्ण: दूसरे देशों से प्रावधान लेना भारतीय संविधान की नकल करना नहीं था। संविधान निर्माताओं ने उन्हें भारतीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया।
12. भारतीय संविधान क्यों सफल हुआ?
भारतीय संविधान की सफलता के पीछे कई कारण हैं।
1. व्यापक चर्चा
संविधान सभा में विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
2. विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व
संविधान सभा में अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों के प्रतिनिधि शामिल थे।
3. लोकतांत्रिक भावना
संविधान निर्माताओं ने लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता और न्याय को महत्व दिया।
4. भारतीय परिस्थितियों का ध्यान
संविधान बनाते समय भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया।
13. संविधान को जीवंत दस्तावेज क्यों कहा जाता है?
समाज समय के साथ बदलता रहता है। इसलिए संविधान में भी आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन किए जा सकते हैं।
भारतीय संविधान में संशोधन की व्यवस्था है।
इसका अर्थ है कि संविधान को पूरी तरह स्थिर नहीं रखा गया है।
समय की आवश्यकता के अनुसार उसमें परिवर्तन किए जा सकते हैं।
इसी कारण संविधान को एक जीवंत दस्तावेज कहा जाता है।
14. न्यायपूर्ण संविधान क्या है?
ऐसा संविधान जो समाज में—
- न्याय
- समानता
- स्वतंत्रता
- शांति
- सुरक्षा
- सम्मान
जैसे मूल्यों को बढ़ावा देता है, उसे न्यायपूर्ण संविधान कहा जा सकता है।
15. प्रभावी संविधान क्या है?
केवल संविधान का लिखा होना पर्याप्त नहीं है।
जब सरकार, राजनीतिक संस्थाएँ और नागरिक संविधान के नियमों का पालन करते हैं और उसके सिद्धांत व्यवहार में लागू होते हैं, तब संविधान प्रभावी माना जाता है।
⭐ परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. संविधान क्या है?
संविधान किसी देश को चलाने वाले मूल नियमों और सिद्धांतों का संग्रह है।
2. संविधान की आवश्यकता क्यों होती है?
देश की शासन व्यवस्था चलाने, सरकार की शक्तियाँ निर्धारित करने, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और समाज में समन्वय स्थापित करने के लिए संविधान आवश्यक है।
3. संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई?
9 दिसंबर 1946 को।
4. संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
डॉ. राजेंद्र प्रसाद।
5. प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?
डॉ. भीमराव अंबेडकर।
6. भारतीय संविधान कब अपनाया गया?
26 नवंबर 1949 को।
7. भारतीय संविधान कब लागू हुआ?
26 जनवरी 1950 को।
8. संविधान को जीवंत दस्तावेज क्यों कहा जाता है?
क्योंकि उसमें समय और परिस्थितियों के अनुसार संशोधन किया जा सकता है।
⭐ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न: संविधान के प्रमुख कार्यों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
संविधान देश की शासन व्यवस्था का आधार है। इसके प्रमुख कार्य हैं—समाज में समन्वय स्थापित करना, सरकार की संरचना निर्धारित करना, सरकार की शक्तियों का विभाजन करना, सरकार की शक्तियों को सीमित करना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना। संविधान देश के मूल आदर्शों और उद्देश्यों को भी स्पष्ट करता है। इसलिए लोकतांत्रिक देश के लिए संविधान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न: भारतीय संविधान का निर्माण कैसे हुआ?
उत्तर:
भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा ने किया। संविधान सभा का गठन 1946 की कैबिनेट मिशन योजना के आधार पर हुआ। इसकी पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई। डॉ. राजेंद्र प्रसाद इसके अध्यक्ष बने और डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। संविधान सभा ने विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श के बाद संविधान को 26 नवंबर 1949 को अपनाया। यह 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।







